एक छोटे से गाँव में एक आदमी अपने बेटे और अपने प्यारे कुत्ते के साथ रहता था। वह आदमी अपने बेटे से तो बेहद प्यार करता ही था, लेकिन कुत्ते के लिए उसका प्यार भी उतना ही गहरा था। कुत्ता उसका साया बनकर हर जगह साथ रहता, खेतों में, घर के आँगन में, यहाँ तक कि मंदिर तक जाने में भी। इंसान और जानवर के बीच का यह रिश्ता इतना मजबूत था कि देखने वाले भी कहते—“ये दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।”
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। अचानक आदमी की मौत हो गई। घर में सन्नाटा छा गया। बेटा अपने पिता के जाने से टूट गया, लेकिन उसने सोचा कि अब कुत्ते की जिम्मेदारी उसी की है। उसने कुत्ते को अपने पास रखा, उसे प्यार दिया, लेकिन कुछ दिनों बाद एक सुबह देखा कि कुत्ता गायब है।
बेटा हैरान रह गया। उसने गाँव में हर जगह ढूँढा, पर कुत्ता कहीं नहीं मिला। तभी अचानक कब्रिस्तान के चौकीदार का फोन आया—“तुम्हारा कुत्ता यहाँ है, वह तुम्हारे पिता की कब्र खोदने की कोशिश कर रहा है।” यह सुनकर बेटे की आँखें भर आईं। वह दौड़कर कब्रिस्तान पहुँचा और कुत्ते को घर ले आया।
लेकिन अगले दिन वही हुआ। कुत्ता फिर भागकर कब्रिस्तान पहुँच गया। बेटे ने फिर उसे वापस लाया। तीसरे दिन भी वही हुआ। अब बेटे ने समझ लिया कि कुत्ता अपने मालिक को छोड़ना नहीं चाहता। भारी मन से उसने कुत्ते को वहीं छोड़ दिया।
बेटे ने सोचा कि कम से कम वह कुत्ते के लिए खाना तो रख आए। उसने कटोरे में रोटी और दूध रखा और कब्र के पास रख दिया। लेकिन कुत्ते ने कुछ भी नहीं खाया। वह बस वहाँ बैठा रहा, जैसे किसी पहरेदार की तरह। जब कोई और कब्र के पास जाता तो वह भौंककर उन्हें दूर भगा देता।
दिन बीतते गए। ठंडी हवाएँ चलने लगीं। बारिश की हल्की बूंदें भी पड़ीं, लेकिन कुत्ता हिला तक नहीं। वह बस वहीं लेटा रहा, जैसे अपने मालिक से कह रहा हो—“तुम अकेले नहीं हो, मैं यहीं हूँ।”
एक हफ्ता गुजर गया। आखिरकार एक सुबह, बेटे को खबर मिली कि कुत्ता अब इस दुनिया में नहीं रहा। लोग कह रहे थे, “कुत्ता अपने मालिक की वफ़ादारी निभाते-निभाते खुद चला गया।” जब बेटा कब्रिस्तान पहुँचा तो देखा कि कुत्ता अपने पिता की कब्र पर लेटा हुआ था, शांत और स्थिर, मानो सो गया हो।
बेटे की आँखों से आँसू रुक ही नहीं रहे थे। उसने महसूस किया कि इंसान कभी-कभी अपने रिश्तों को भूल जाता है, लेकिन जानवर अपनी वफ़ादारी आख़िरी सांस तक निभाते हैं।
यह कहानी हर किसी के दिल को छू जाती है। यह सिर्फ़ एक कुत्ते की कहानी नहीं, बल्कि उस पवित्र रिश्ते की है जिसे शब्दों में बाँधना मुश्किल है—वफ़ादारी, प्रेम और त्याग का रिश्ता। शायद इसी वजह से कहा जाता है कि जानवर इंसानों से ज़्यादा सच्चे और वफ़ादार होते हैं।
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