भारत के इतिहास में 23 जून 1757 का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन बंगाल की धरती पर एक ऐसी लड़ाई लड़ी गई जिसने न केवल भारतीय इतिहास की धारा को बदल दिया बल्कि भारत में ब्रिटिश शासन की नींव रखी। इस युद्ध को हम प्लासी का युद्ध (Battle of Plassey) के नाम से जानते हैं। यह युद्ध बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच लड़ा गया था। यह केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि राजनीतिक षड्यंत्र, विश्वासघात और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं की जटिल कहानी थी। इस युद्ध ने भारत में अंग्रेजों के लिए सत्ता के द्वार खोल दिए और उनके औपनिवेशिक शासन की नींव डाल दी।
1️⃣ पृष्ठभूमि – बंगाल की समृद्धि और अंग्रेजों की महत्वाकांक्षा
18वीं शताब्दी का बंगाल भारत के सबसे समृद्ध प्रांतों में से एक था। यहाँ की उपजाऊ भूमि, नदियों की प्रचुरता, कपड़ा उद्योग, रेशम उत्पादन और व्यापारिक गतिविधियों ने इसे दुनिया का व्यापारिक केंद्र बना दिया था। यूरोपीय कंपनियाँ – फ्रांसीसी, डच, पुर्तगाली और अंग्रेज – सभी यहाँ व्यापार करने को लालायित थे।
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी, जिसे 1600 में चार्टर प्राप्त हुआ था, भारत में व्यापार कर रही थी। मुगल शासन के कमजोर पड़ने के बाद बंगाल में नवाबों का प्रभाव बढ़ा। 1756 में सिराजुद्दौला बंगाल का नवाब बना। उसने अंग्रेजों पर कई कारणों से असंतोष जताया:
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अंग्रेजों ने बिना अनुमति के कलकत्ता में किलेबंदी की।
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वे व्यापारिक करों का भुगतान नहीं कर रहे थे।
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अंग्रेज फ्रांसीसी प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ षड्यंत्र कर रहे थे।
इससे नवाब और अंग्रेजों के बीच टकराव बढ़ने लगा।
2️⃣ युद्ध के तत्कालीन कारण
प्लासी युद्ध का मुख्य कारण सिराजुद्दौला और अंग्रेजों के बीच विश्वास की कमी और शक्ति संघर्ष था। मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
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कलकत्ता का अधिग्रहण: नवाब ने 1756 में अंग्रेजों के कलकत्ता किले पर हमला कर उसे अपने कब्जे में ले लिया।
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ब्लैक होल ट्रेजेडी: इस घटना में कुछ अंग्रेज कैदियों की मौत हुई, जिसे अंग्रेजों ने प्रचारित कर नवाब के खिलाफ समर्थन जुटाया।
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व्यापारिक अधिकारों का उल्लंघन: अंग्रेज अपने व्यापार में करमुक्ति का दुरुपयोग कर रहे थे।
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षड्यंत्रकारी गतिविधियाँ: अंग्रेज बंगाल दरबार के असंतुष्ट अमीरों, जैसे मीर जाफर, से संपर्क कर नवाब को हटाने की योजना बना रहे थे।
3️⃣ युद्ध से पहले का षड्यंत्र – विश्वासघात की कहानी
प्लासी के युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण पहलू था आंतरिक षड्यंत्र। रॉबर्ट क्लाइव, जो अंग्रेजों की ओर से नेतृत्व कर रहे थे, ने नवाब के सेनापति मीर जाफर, व्यापारी जगतमल और बैंकर मनियाराम को अपने पक्ष में कर लिया। उन्होंने वादा किया कि युद्ध के बाद मीर जाफर को बंगाल का नवाब बनाया जाएगा और उसे बड़े पैमाने पर धन मिलेगा।
इस षड्यंत्र के कारण सिराजुद्दौला की सेना में विश्वासघात पनप गया। यह युद्ध एक प्रकार से सैन्य शक्ति से अधिक राजनीतिक चालबाजी का परिणाम था।
4️⃣ युद्ध का क्रम (23 जून 1757)
प्लासी युद्ध का मैदान भागीरथी नदी के किनारे स्थित प्लासी नामक स्थान पर था। सिराजुद्दौला की सेना लगभग 50,000 सैनिकों की थी जबकि अंग्रेजों की सेना लगभग 3,000 सैनिकों की थी। संख्या में बहुत कम होने के बावजूद अंग्रेजों ने रणनीति और विश्वासघात के बल पर जीत हासिल की।
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युद्ध के दौरान मीर जाफर और उनके समर्थकों ने निष्क्रिय रहकर नवाब का साथ नहीं दिया।
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अंग्रेजों के पास आधुनिक तोपें और हथियार थे, जबकि नवाब की सेना में अनुशासन की कमी थी।
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सिराजुद्दौला युद्धक्षेत्र छोड़कर भागने लगे, जिससे उनकी सेना में अफरा-तफरी मच गई।
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परिणामस्वरूप अंग्रेजों ने निर्णायक जीत हासिल की।
5️⃣ युद्ध का परिणाम
प्लासी के युद्ध का परिणाम दूरगामी और ऐतिहासिक महत्व का रहा:
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मीर जाफर का नवाब बनना: षड्यंत्र के तहत मीर जाफर को बंगाल का नवाब बना दिया गया।
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ब्रिटिश प्रभाव की शुरुआत: ईस्ट इंडिया कंपनी बंगाल की वास्तविक शासक बन गई।
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आर्थिक लूट: अंग्रेजों ने बंगाल के खजाने से भारी मात्रा में धन लूटा। कहा जाता है कि युद्ध के बाद क्लाइव और अंग्रेजी अधिकारियों को करोड़ों रुपये मिले।
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भारतीय सत्ता का पतन: प्लासी ने भारतीय राज्यों की राजनीतिक अस्थिरता को उजागर किया, जिससे अंग्रेजों के लिए आगे विस्तार करना आसान हो गया।
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भारत में औपनिवेशिक शासन की नींव: यह पहला मौका था जब किसी यूरोपीय कंपनी ने भारतीय शासक को पराजित कर एक प्रांत पर अपना नियंत्रण स्थापित किया।
6️⃣ प्लासी का युद्ध – ऐतिहासिक महत्व
प्लासी के युद्ध का भारतीय इतिहास पर गहरा प्रभाव पड़ा:
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ब्रिटिश सत्ता का उदय: इस युद्ध ने भारत में ब्रिटिश शासन की नींव रखी, जिसने अगले 190 वर्षों तक देश पर राज किया।
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भारतीय सामंतवाद की कमजोरी: भारतीय शासकों की आपसी कलह, विश्वासघात और स्वार्थ ने विदेशी ताकतों को मजबूत किया।
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आर्थिक शोषण की शुरुआत: अंग्रेजों ने बंगाल की संपदा को लूटा और भारत के संसाधनों का दोहन शुरू हुआ।
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राजनीतिक षड्यंत्र का दौर: प्लासी के बाद अंग्रेजों ने इसी रणनीति से अन्य भारतीय रियासतों को अपने कब्जे में लिया।
7️⃣ प्लासी का सबक
यह युद्ध भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। यह हमें बताता है कि विदेशी शक्तियाँ तब ही मजबूत होती हैं जब स्थानीय नेतृत्व बिखरा हुआ और विश्वासघात से ग्रस्त हो।
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भारतीय शासक यदि एकजुट रहते तो शायद अंग्रेजों का बढ़ता प्रभाव रोका जा सकता था।
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यह युद्ध हमें राजनीतिक एकता, पारदर्शिता और देशभक्ति का महत्व सिखाता है।
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