मुंबई की एक बड़ी होटल कंपनी के मालिक ने अपने ग्राहकों के सामने एक अजीब सी चुनौती रखी।
उसने कहा,
"इस मगरमच्छों से भरे तालाब में जो भी व्यक्ति छलांग लगाएगा और ज़िंदा बाहर आ जाएगा, उसे 5 करोड़ रुपये का इनाम मिलेगा।
लेकिन अगर मगरमच्छों ने उसे खा लिया, तो उसके परिवार को 2 करोड़ दिए जाएंगे।"
पूरा माहौल अचानक सन्नाटे में बदल गया।
लोग एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।
सबके चेहरों पर डर साफ़ नज़र आ रहा था।
कोई भी इतना साहसी नहीं था कि तालाब के पास भी जाए।
तभी…
छपाक!
एक ज़ोरदार आवाज़ हुई — किसी ने तालाब में छलांग लगा दी थी!
भीड़ में हलचल मच गई।
सब लोग स्तब्ध होकर उस व्यक्ति को देखने लगे।
वह आदमी जान बचाने के लिए पानी में पूरी ताक़त से हाथ-पैर मार रहा था।
मगरमच्छ उसके पीछे थे — बेहद करीब!
लेकिन वो रुका नहीं, थमा नहीं।
उसने पूरी जान लगाकर किनारे की तरफ़ तैरना शुरू कर दिया।
पल भर को लगा — अब गया, मगर…
अगले ही पल वो आदमी किसी तरह तैरकर तालाब के दूसरी तरफ़ किनारे पर पहुंच गया!
लोगों ने तालियाँ बजाना शुरू कर दीं।
हर कोई उसकी बहादुरी की तारीफ़ कर रहा था।
वह आदमी थका हुआ था, हांफ रहा था…
जब उसे होश आया और समझ में आया कि वो 5 करोड़ जीत चुका है,
उसने गुस्से और हैरानी से पूछा:
"मुझे तालाब में धक्का किसने दिया था?"
तभी पीछे से एक महिला ने हाथ उठाया।
वो उसकी पत्नी थी।
वो मुस्कुराते हुए बोली,
"तुम करते भी क्या हो?
अगर बच गए तो करोड़पति बन जाओगे,
और अगर नहीं बचे, तो मुझे 2 करोड़ मिलते।
दोनों हालतों में फायदा तो मेरा ही था!"
उस दिन से यह बात मज़ाक नहीं, हकीकत बन गई —
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