आज के डिजिटल युग में, जहाँ ऑनलाइन लेनदेन हमारी ज़िंदगी का एक अभिन्न अंग बन गया है, वहाँ धोखाधड़ी के नए-नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। एक ऐसी ही चालाकी भरी कहानी सामने आई है, जो दिखाती है कि कैसे धोखेबाज आपकी ईमानदारी का फायदा उठाकर आपको बड़े जाल में फँसा सकते हैं। इस घटना को समझकर आप खुद को और अपने प्रियजनों को सुरक्षित रख सकते हैं।
साइबर फ्रॉड का तरीका क्या है?
यह फ्रॉड एक साधारण गलती की तरह शुरू होता है, लेकिन इसके पीछे एक सोची-समझी साजिश होती है:
गलती से पैसे भेजना: धोखेबाज आपको एक बड़ी रकम (जैसे ₹50,000) आपके बैंक खाते में भेजता है। यह जानबूझकर किया जाता है ताकि आप इसे किसी की "गलती" मान लें।
तुरंत वापस करने का दबाव: पैसा मिलते ही, वह व्यक्ति आपको कॉल करके तुरंत पैसे वापस करने का दबाव बनाता है। वह बहाना बनाता है कि उसने गलती से अपनी बहन या किसी रिश्तेदार को पैसे भेजने के बजाय आपको भेज दिए हैं।
दूसरा अकाउंट नंबर देना: वह आपसे कहता है कि आप उसके दिए गए किसी दूसरे अकाउंट नंबर पर पैसे वापस कर दें। यहीं पर असली जाल बिछाया जाता है।
इस जाल में फँसने से क्या होता है?
अगर आप उनके बताए गए अकाउंट में पैसे वापस भेज देते हैं, तो आप दोहरी धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।
पहला फ्रॉड: जिस अकाउंट से आपको पैसे भेजे गए थे (जैसे हिना प्रजापति), उस अकाउंट धारक ने असल में बैंक में एक "गलत लेनदेन" का दावा (claim) कर रखा होता है। बैंक नियमों के अनुसार, अगर खाताधारक यह दावा करता है कि उसने गलती से पैसे भेज दिए हैं, तो बैंक कुछ दिनों बाद वह राशि आपके खाते से वापस उसी के खाते में भेज देता है।
दूसरा फ्रॉड: जब आप हड़बड़ी में धोखेबाज के दूसरे खाते में पैसे भेज देते हैं, तो आपके खाते से पैसे कट जाते हैं। कुछ दिनों बाद, बैंक के सिस्टम द्वारा भी पहली वाली राशि वापस चली जाती है। इस तरह, आपको ₹50,000 के बदले में ₹1,00,000 का नुकसान होता है!
धोखेबाज इस बीच लगातार आपको फोन करके दबाव बनाता रहता है ताकि आप बिना सोचे-समझे तुरंत पैसे ट्रांसफर कर दें, और बैंक के सिस्टम से पैसे वापस जाने का इंतज़ार न करें।
इस तरह के फ्रॉड से कैसे बचें?
यह जानना बेहद ज़रूरी है कि ऐसे में क्या करना चाहिए ताकि आप ठगी का शिकार न हों।
तुरंत ट्रांसफर न करें: अगर कोई आपके खाते में पैसे भेजता है और तुरंत वापस करने का दबाव बनाता है, तो कभी भी जल्दबाजी न करें। यह एक बड़ा लाल झंडा (red flag) है।
केवल बैंक के माध्यम से वापस करें: अगर आपको लगता है कि पैसा गलती से आया है, तो अपने बैंक की शाखा में जाएँ या ग्राहक सेवा से संपर्क करें। उनसे कहें कि वे अपने सिस्टम के माध्यम से ही उस लेनदेन की जाँच करें और पैसे वापस भेजें। कभी भी किसी भी दूसरे व्यक्ति के खाते में पैसे ट्रांसफर न करें, चाहे वह कितना भी दबाव बनाए।
जामताड़ा फ्रॉड से बचें: याद रखें, कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान आपसे आपका OTP, पासवर्ड, या पिन नंबर नहीं मांगता है। अगर कोई व्यक्ति आपको लालच देकर या डरा-धमका कर ऐसी जानकारी मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ।
शक होने पर ब्लॉक करें: अगर आपको लगे कि कोई आपको ठगने की कोशिश कर रहा है, तो बिना देर किए उसका नंबर ब्लॉक कर दें और जरूरत पड़ने पर पुलिस को सूचित करें।
इस तरह की घटनाओं में धैर्य और समझदारी ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है। अपनी ईमानदारी को बनाए रखें, लेकिन डिजिटल दुनिया की चालाकियों से खुद को बचाना न भूलें।
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