अजूबा: 90 के दशक की वह फैंटेसी सुपरहीरो फिल्म जो अपने समय से आगे थी | Ajuba: The 90s Fantasy Superhero Film That Was Ahead of Its Time

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फिल्म ‘अजूबा’ हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक ऐसी महत्वाकांक्षी कोशिश थी, जिसने 90’s की शुरुआत में फैंटेसी और सुपरहीरो जॉनर को एक नए स्तर पर ले जाने का सपना देखा। उस दौर में जब बॉलीवुड ज़्यादातर पारिवारिक ड्रामा, रोमांस और एक्शन तक सीमित था, तब ‘अजूबा’ जैसी फिल्म बनाना अपने आप में एक बड़ा रिस्क था। इस फिल्म ने यह साबित किया कि भारतीय सिनेमा भी कल्पनाओं की दुनिया रचने की हिम्मत रखता है, भले ही उसका परिणाम बॉक्स ऑफिस पर जैसा भी रहा हो।

शशि कपूर द्वारा प्रोड्यूस और डायरेक्ट की गई इस फिल्म को सोवियत डायरेक्टर गेन्नादी वासिलीव ने को-डायरेक्ट किया था। यही वजह है कि ‘अजूबा’ में भारतीय भावनाओं और रूसी फैंटेसी स्टाइल का एक अनोखा संगम देखने को मिलता है। फिल्म की मेकिंग, सेट डिज़ाइन और विज़ुअल ट्रीटमेंट उस समय की आम हिंदी फिल्मों से बिल्कुल अलग था। यह एक ऐसा प्रयोग था, जिसमें इंटरनेशनल कोलैबोरेशन के ज़रिए भारतीय दर्शकों को कुछ नया दिखाने की कोशिश की गई।

12 अप्रैल 1991 को ईद के मौके पर रिलीज़ हुई ‘अजूबा’ में अमिताभ बच्चन ने टाइटल रोल निभाया। वे इस फिल्म में एक ऐसे नकाबपोश सुपरहीरो के रूप में नज़र आते हैं, जो बहारिस्तान नाम के एक काल्पनिक राज्य में अत्याचार के खिलाफ लड़ता है और आम जनता की मदद करता है। अमिताभ का किरदार रहस्यमय है, ताकतवर है और न्याय के लिए समर्पित है। उस दौर में जब सुपरहीरो की अवधारणा भारतीय सिनेमा में नई थी, बिग बी का यह अवतार दर्शकों के लिए काफी आकर्षक रहा।

फिल्म की स्टारकास्ट भी इसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक थी। अमिताभ बच्चन के साथ ऋषि कपूर, डिम्पल कपाड़िया, सोनम, शम्मी कपूर, अमरीश पुरी और सईद जाफरी जैसे दिग्गज कलाकार शामिल थे। अमरीश पुरी ने हमेशा की तरह अपने विलेन वाले रोल में दमदार प्रभाव छोड़ा, जबकि शम्मी कपूर और सईद जाफरी जैसे कलाकारों ने फिल्म को एक शाही और भव्य एहसास दिया। इस बड़े स्टारकास्ट ने फिल्म को विजुअली और परफॉर्मेंस के स्तर पर काफी समृद्ध बना दिया।

‘अजूबा’ की कहानी अरबी लोककथाओं और ‘थाउज़ेंड एंड वन नाइट्स’ से प्रेरित थी। इसमें जादू, रहस्य, शाही महल, खजाने और अत्याचारी शासकों के खिलाफ विद्रोह जैसे तत्व शामिल थे। फिल्म के सेट चमकदार और भव्य थे, कॉस्ट्यूम बेहद रंगीन और शाही अंदाज़ में डिज़ाइन किए गए थे। उस समय के हिसाब से इसके विज़ुअल इफेक्ट्स भी काफी बड़े माने जाते थे, भले ही आज के डिजिटल युग में वे साधारण लगें।

करीब 8 करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘अजूबा’ उस समय की सबसे महंगी भारतीय फिल्मों में से एक थी। इतने बड़े बजट और भारी-भरकम प्रोडक्शन के बावजूद, फिल्म भारतीय बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई। यह अपना आधा बजट भी रिकवर नहीं कर पाई। इसके पीछे कई वजहें मानी जाती हैं, जैसे कमजोर स्क्रीनप्ले, धीमी कहानी और उस समय के दर्शकों का फैंटेसी जॉनर के लिए पूरी तरह तैयार न होना। शायद यह फिल्म अपने समय से थोड़ी आगे थी, जिसे उस दौर में सही सराहना नहीं मिल सकी।

हालांकि बॉक्स ऑफिस पर असफल रहने के बावजूद, ‘अजूबा’ समय के साथ एक अलग पहचान बनाने में कामयाब रही। टीवी पर इसके बार-बार री-रन और बाद में यूट्यूब पर उपलब्ध क्लिप्स ने इसे 90’s के बच्चों के लिए एक नॉस्टेल्जिक कल्ट फेवरेट बना दिया। जिन दर्शकों ने इसे बचपन में देखा, उनके लिए यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि यादों का हिस्सा बन गई।

आज जब हम ‘अजूबा’ को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो इसकी कमियां साफ नज़र आती हैं। कहानी कमजोर है, पटकथा में कसाव की कमी है और कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा खिंचे हुए लगते हैं। लेकिन इसके बावजूद अमिताभ बच्चन का सुपरहीरो स्वैग, भव्य सेट्स और उस दौर की ईमानदार कोशिश दिल जीत लेती है। यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि प्रयोग हमेशा सफल नहीं होते, लेकिन वे सिनेमा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

अंततः ‘अजूबा’ को सिर्फ एक फ्लॉप फिल्म के तौर पर देखना इसके साथ नाइंसाफी होगी। यह हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में से है, जिन्होंने सीमाओं को तोड़ने की कोशिश की और एक नई दुनिया रचने का साहस दिखाया। शायद यही वजह है कि आज भी ‘अजूबा’ का नाम आते ही 90’s के दर्शकों के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान और ढेर सारी यादें ताज़ा हो जाती हैं।

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