यह घटना 1998 में रिलीज़ हुई फिल्म "क़रीब" की शूटिंग के दौरान की है। यह फिल्म विधु विनोद चोपड़ा के निर्देशन में बनी थी और इसमें बॉबी देओल और नेहा (असली नाम शबाना रज़ा) मुख्य भूमिकाओं में थे।

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 धूप से भरी एक ठंडी सुबह थी। पहाड़ों के बीच, “क़रीब” के सेट पर हल्की हवा चल रही थी। कैमरे तैयार थे, लाइट्स सेट थीं, और निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की निगाहें हर छोटे-बड़े डिटेल पर टिकी थीं।

उस दिन का सीन सरल लग रहा था—नेहा (शबाना रज़ा) को एक पहाड़ी से नीचे उतरना था और बॉबी देओल को अपना लेफ़्ट हैंड पकड़ाना था। लेकिन कैमरे के सामने यह सादगी बार-बार उलझन में बदल रही थी।

पहला टेक शुरू हुआ—
नेहा धीरे-धीरे उतरती हैं, बॉबी हाथ आगे बढ़ाते हैं… लेकिन वह राइट हैंड दे देती हैं।
कट!
विधु विनोद चोपड़ा हल्के से मुस्कुराकर समझाते—
“नेहा, लेफ़्ट… बस लेफ़्ट।”

दूसरा टेक, तीसरा टेक, फिर चौथा… और गलती वही।
सेट पर हल्की हंसी भी गूंजने लगी, लेकिन नेहा की आंखों में झलक रही थी हल्की घबराहट। वह नई थीं, डेब्यू फिल्म थी, और उनके सामने खड़े थे बड़े स्टार और सख्त माने जाने वाले निर्देशक।

तभी चोपड़ा साहब ने एक अजीब सा उपाय सुझाया—
“ऐसा करो, अपने राइट हैंड को हल्का सा काट लो… ताकि याद रहे कि यही हाथ नहीं देना है।”
नेहा ने संकोच के साथ अपने दांतों से हाथ को हल्का सा दबा दिया।

कैमरा फिर चला।
और… फिर वही गलती।
अब तक 10-12 रीटेक हो चुके थे। माहौल में थोड़ी बेचैनी बढ़ रही थी।

लगभग 20वें रीटेक के बाद, निर्देशक का धैर्य जवाब देने लगा। वह खुद आगे बढ़े, नेहा के राइट हैंड को अपने हाथ में लिया… और जोर से काट लिया।
“अब तो याद रहेगा!” उन्होंने सख्त आवाज़ में कहा।

सेट पर एक पल को सन्नाटा छा गया।
नेहा की आंखें चौड़ी हो गईं, चेहरा पीला पड़ गया, हाथ कांपने लगे।
बॉबी देओल, जो ये सब देख रहे थे, खुद भी हैरान रह गए।

एक और टेक लिया गया।
नेहा अब इतनी नर्वस थीं कि उनका ध्यान सीन पर नहीं रह पा रहा था। पहाड़ी से उतरीं… और फिर वही राइट हैंड।
चोपड़ा साहब ने एक गहरी सांस ली, फिर कहा—
“ठीक है… यही रखो। ओके।”

सालों बाद, बॉबी देओल ने यह किस्सा एक अखबार में सुनाया। उन्होंने कहा—
“मैंने ऐसा कभी किसी सेट पर नहीं देखा था। नेहा नई थीं, और चोपड़ा जी ने उन्हें बहुत मेहनत से फिल्म में लिया था—माता-पिता से बात करके, मनाकर।”

17 जुलाई 1998 को “क़रीब” रिलीज़ हुई। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास नहीं कर पाई—लगभग 6.5 करोड़ के बजट में सिर्फ 6.82 करोड़ की कमाई, फ्लॉप घोषित।
लेकिन इसके गाने, खासकर "चोरी चोरी जब नज़रें मिली", उस दौर के रोमांटिक एंथम बन गए।

आज 27 साल बाद भी, यह किस्सा सुनते ही आंखों के सामने एक पहाड़ी, बॉबी का बढ़ा हुआ हाथ, और एक घबराई हुई नई अभिनेत्री का चेहरा तैर जाता है… जो बस यह तय नहीं कर पा रही थी कि कौन सा हाथ पकड़ाना है।

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