कर्म का फल: श्रीकृष्ण और माता देवकी की कथा

Lord Krishna's life lessons, karma philosophy in Hinduism, and the significance of mythological stories like those involving Krishna, Kans, and his parents Devaki and Vasudeva. The narrative's connection to the Ramayana through Queen Kaikeyi and Lord Rama adds a layer of inter-textual relevance, while the role of Mother Yashoda highlights the themes of unconditional love and motherhood. Other relevant terms are Hindu mythology, the law of karma, and the concept of divine justice.


कंस का वध करने के बाद, भगवान कृष्ण ने तुरंत कारागार का रुख किया। वहां उन्होंने अपने माता-पिता, देवकी और वसुदेव, को बंधन से मुक्त कराया। जैसे ही वे आजाद हुए, माता देवकी ने अपने पुत्र से एक सवाल पूछा, जिसने उनके मन में कई सालों से उथल-पुथल मचा रखी थी।

“हे कृष्ण, तुम तो भगवान हो। तुम्हारे पास असीम शक्तियां हैं। फिर तुमने कंस का वध करने और हमें इन कष्टों से मुक्ति दिलाने में चौदह साल का समय क्यों लिया?”

कृष्ण ने मुस्कुराते हुए अपनी माता के चरणों में शीश झुकाया और अत्यंत विनम्रता से बोले, “हे माता, मुझे क्षमा करें, लेकिन क्या आपने ही मुझे पिछले जन्म में चौदह साल के लिए वनवास नहीं भेजा था?”

कृष्ण की बात सुनकर देवकी चकित रह गईं। उन्हें कुछ भी समझ नहीं आया। “यह तुम क्या कह रहे हो, कृष्ण? ऐसा कैसे हो सकता है?”

तब कृष्ण ने उन्हें उनके पूर्व जन्म का रहस्य बताया। “माता, आपको शायद कुछ भी याद नहीं है, लेकिन पिछले जन्म में आप कैकेयी थीं और पिता वसुदेव राजा दशरथ थे।”

देवकी ने हैरानी से पूछा, “तो फिर महारानी कौशल्या कौन थीं?”

कृष्ण ने गहरी सांस ली और कहा, “वही इस जन्म में मेरी माता यशोदा हैं। पिछले जन्म में उन्हें चौदह साल तक जिस मां के प्यार से वंचित रहना पड़ा था, वह उन्हें इस जन्म में मिला है।”

यह सुनकर देवकी की आंखों से अश्रुधारा बह निकली। उन्हें अपने पूर्व जन्म के कर्मों का फल समझ आ गया। इस कहानी का सार यही है कि इस धरती पर हर प्राणी को अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ता है। यहां तक कि भगवान और देवी-देवता भी कर्मों के बंधन से मुक्त नहीं हैं।

इसलिए हमें कभी भी अहंकार में नहीं डूबना चाहिए। क्योंकि अहंकार एक ऐसा महल है जो इंसान को सच्चाई से दूर रखता है। इसके विपरीत, हमें हमेशा नम्रता और विनम्रता की झोपड़ी में रहना चाहिए, क्योंकि यही हमें मानवता के करीब रखती है। यह कहानी हमें सिखाती है कि हम जो भी करते हैं, उसका परिणाम हमें इस जीवन में या अगले जीवन में जरूर मिलता है। इसलिए, हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए और किसी भी परिस्थिति में अहंकार को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए।

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