किस्सा देव साहब।



धरम जी ऑडिशन देने वालों की लाइन में लगे थे कि एक हाथ उनके कंधे पर आया। धरम जी ने मुड़कर देखा। वो देव आनंद थे। ये तब की बात है जब धरम जी फ़िल्मों में कुछ भी नहीं थे। धरम जी ने जब फ़िल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था तब दिलीप-देव-राज की तिकड़ी का जलवा हुआ करता था। और धरम जी भी इस तिकड़ी के कायल थे।

फ़िल्मफ़ेयर टैलेंट कॉन्टैस्ट से भले ही धरम जी को फ़िल्म इंडस्ट्री में बढ़िया चर्चा मिल गई थी। मगर काम उन्हें जल्दी से नहीं मिला था। धरम जी स्टूडियो दर स्टूडियो काम मांगने के लिए भटक ही रहे थे। एक दिन धरम जी किसी फ़िल्म के लिए ऑडिशन देने गए थे। और दूसरे प्रतिभागियों के साथ लाइन में लगे थे। तभी एक हाथ धरम जी के कंधे पर आया। वो देव आनंद थे।

देव साहब ने अपने चिर-परिचित स्टाइल में धरम जी से कहा,"डोन्ट बी नर्वस यू टफ़ी। यू विल मेक इट। यू लुक गुड। कमऑन, हैव लंच विद मी।" फिर धरम जी को देव साहब अपने साथ ले गए। देव साहब तो ऐसे थे मानो ये सब कोई बड़ी बात ना हो। मगर उस वक्त धर्मेंद्र जी के लिए वो बहुत बड़ी बात थी। धर्मेंद्र जी को यकीन नहीं हो पा रहा था कि वाकई में उनके साथ वो हो रहा था। धरम जी और देव साहब ने उस दिन साथ में लन्च किया। खाना खाने के बाद धरम जी हाथ धोकर पानी पीने ही जा रहे थे कि देव साहब ने उन्हें रोक दिया।

देव साहब ने धरम जी को अपने आईस बॉक्स में से ठंडा पानी निकालकर दिया। उस दिन धरम जी ने पहली बार आईस बॉक्स देखा था। धरम जी जब शाम को अपने ठिकाने पर वापस आ गए तो रात को सही से सो ना सके। वो देव साहब के बारे में ही सोचते रहे। कहीं ना कहीं उन्हें अब भी लग रहा था कि वो शायद कोई ख्वाब देख रहे थे जिसमें देव साहब उनके बहुत क़रीब थे। देव साहब के साथ उन्होंने इतना वक्त गुज़ारा था। उस दिन को याद करते हुए एक बार धरम जी ने कहा था कि फ़िल्मफ़ेयर कॉन्टेस्ट से मेरा हौंसला बहुत बढ़ गया था। मगर जिस तरह से देव साहब ने मुझे उस दिन प्रेरित किया था, मुझे लगने लगा था कि अब मैं सच में कुछ ना कुछ तो कर लूंगा।

धरम जी जब फ़िल्मस्टार बन गए तो उनके मन में ये ख्वाहिश बहुत रहती थी कि कभी वो धरम जी के साथ भी काम करें। मगर देव साहब मोस्टली सोलो हीरो वाली फ़िल्में प्रिफ़र करते थे। एक बार चांस बने थे जब धरम और देव एक फ़िल्म में साथ काम करने वाले थे। 1979 में देव साहब के भाई व नामी फ़िल्मकार विजय आनंद ने एक फ़िल्म बनाने का प्लान किया था जिसका नाम था 'एक दो तीन चार।' उस फ़िल्म में ऋषि कपूर व शशि कपूर को भी कास्ट किया गया था। मगर वो फ़िल्म कभी बन नहीं सकी।

देव साहब के साथ स्क्रीन शेयर करने का धरम जी का ख्वाब पूरा हुआ था साल 1996 की फ़िल्म 'रिटर्न ऑफ़ ज्वैल थीफ़' में। धर्मेंद्र जी इस फ़िल्म में 'पुलिस कमिश्नर सूर्यदेव सिंह' के किरदार में नज़र आए थे। और देव साहब डबल रोल में थे। इस फ़िल्म की शूटिंग के दौरान देव साहब ने धरम जी के बारे में एक बार कहा था,''धरम आज भी उतना ही शर्मीला है जितना पहले हुआ करता था।''

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